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श्लोक  12.38.1 
वैशम्पायन उवाच
प्रवेशने तु पार्थानां जनानां पुरवासिनाम्।
दिदृक्षूणां सहस्राणि समाजग्मु: सहस्रश:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! जब कुन्तीपुत्र हस्तिनापुर में प्रवेश कर रहे थे, तब दस लाख नगरवासी उन्हें देखने के लिए सड़कों पर एकत्र हुए थे।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! When the sons of Kunti were entering Hastinapur, ten lakh residents of the city gathered on the streets to see them. 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)