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mahabharat 12.37.8-9: जिन्हें दिव्य त्रिपथगा गंगादेवी ने जन्म दिया है, जिन्होंने इन्द्र आदि समस्त देवताओं को साक्षात् देखा है और जिन्होंने बृहस्पति आदि देवताओं को अपनी सेवा से बारम्बार संतुष्ट करने वाले महाबली भीष्म द्वारा राजनीति का अध्ययन किया है, उनके पास आओ।' 8-9॥   |   mahabharat अध्याय 12.37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  12.37.8-9 
जनयामास यं देवी दिव्या त्रिपथगा नदी।
साक्षाद् ददर्श यो देवान् सर्वानिन्द्रपुरोगमान्॥ ८॥
बृहस्पतिपुरोगांस्तु देवर्षीनसकृत् प्रभु:।
तोषयित्वोपचारेण राजनीतिमधीतवान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जिन्हें दिव्य त्रिपथगा गंगादेवी ने जन्म दिया है, जिन्होंने इन्द्र आदि समस्त देवताओं को साक्षात् देखा है और जिन्होंने बृहस्पति आदि देवताओं को अपनी सेवा से बारम्बार संतुष्ट करने वाले महाबली भीष्म द्वारा राजनीति का अध्ययन किया है, उनके पास आओ।' 8-9॥
 
'Come to those who have been given birth by the divine river Tripathaga Gangadevi, who have personally seen all the gods like Indra and who have studied politics by the mighty Bhishma who has repeatedly satisfied the gods like Jupiter and others by his service.' 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)