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mahabharat 12.37.5: वैशम्पायनजी कहते हैं - महाराज! तब वेदों के विद्वानों में श्रेष्ठ व्यासजी ने सर्वज्ञ मुनियों में वृद्ध नारदजी की ओर देखकर युधिष्ठिर से कहा - ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.37.5 
वैशम्पायन उवाच
तमुवाच महाराज व्यासो वेदविदां वर:।
नारदं समभिप्रेक्ष्य सर्वज्ञानां पुरातनम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - महाराज! तब वेदों के विद्वानों में श्रेष्ठ व्यासजी ने सर्वज्ञ मुनियों में वृद्ध नारदजी की ओर देखकर युधिष्ठिर से कहा - ॥5॥
 
Vaishmpayana says, 'Maharaj! Then Vyasa, the best amongst the scholars of Vedas, looking at Narada, the oldest amongst the omniscient sages, said to Yudhishthira, '॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)