श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.37.46 
पाण्डुरेण च माल्येन पताकाभिश्च मेदिनी।
संस्कृतो राजमार्गोऽभूद्‍धूपनैश्च प्रधूपित:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
नगर के प्रांगण को श्वेत मालाओं और पताकाओं से सजाया गया। राजमार्ग को झाड़ा गया, जल छिड़का गया और धूपबत्ती की सुगंध फैलाई गई।
 
The city grounds were decorated with white garlands and banners. The highway was swept and sprinkled with water and the fragrance of incense was spread. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)