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mahabharat 12.37.45: राजा युधिष्ठिर की इस यात्रा के दौरान नगर के नागरिकों ने पूरे नगर और उसके मार्गों को सुन्दर ढंग से सजाया था।   |   mahabharat अध्याय 12.37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.37.45 
अभियाने तु पार्थस्य नरैर्नगरवासिभि:।
नगरं राजमार्गाश्च यथावत्समलङ्कृता:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर की इस यात्रा के दौरान नगर के नागरिकों ने पूरे नगर और उसके मार्गों को सुन्दर ढंग से सजाया था।
 
During this visit of King Yudhishthira the citizens of the city had decorated the entire city and its roads beautifully. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)