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mahabharat 12.37.44: महाबाहु युधिष्ठिर का यह विशाल जुलूस इस धरती पर अद्वितीय था। यह बलवान पुरुषों से भरा हुआ था। भीड़ बढ़ती जा रही थी और ज़ोरदार जयकारे और कोलाहल हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 12.37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.37.44 
तत् प्रयाणं महाबाहोर्बभूवाप्रतिमं भुवि।
आकुलाकुलमुत्क्रुष्टं हृष्टपुष्टजनाकुलम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु युधिष्ठिर का यह विशाल जुलूस इस धरती पर अद्वितीय था। यह बलवान पुरुषों से भरा हुआ था। भीड़ बढ़ती जा रही थी और ज़ोरदार जयकारे और कोलाहल हो रहे थे।
 
This mass procession of the mighty-armed Yudhishthira was unique on this earth. It was full of able-bodied men. The crowd kept on increasing and there was loud shouting and uproar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)