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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश
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श्लोक 42
श्लोक
12.37.42
ततो रथाश्च बहुला नागाश्वसमलंकृता:।
पादाताश्च हयाश्चैव पृष्ठत: समनुव्रजन्॥ ४२॥
अनुवाद
उनके पीछे बहुत से रथी, पैदल और घुड़सवार हाथी और घोड़ों से सुसज्जित होकर चल रहे थे।
Following them all were marching a large number of charioteers, infantry and horse-riders adorned with elephants and horses. 42.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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