श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.37.40 
नरयानेन तु ज्येष्ठ: पिता पार्थस्य भारत।
अग्रतो धर्मराजस्य गान्धारीसहितो ययौ॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
भरतपुत्र! कुंतीपुत्र धर्मराज, युधिष्ठिर के बड़े पिता (चाचा) गांधारी के साथ पालकी में बैठकर उनके आगे जा रहे थे।
 
Bharata's son! Kunti's son Dharmaraja, Yudhishthira's elder father (uncle) was going ahead of him sitting in a palanquin along with Gandhari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)