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धर्मचर्या च राज्यं च नित्यमेव विरुध्यते।
एवं मुह्यति मे चेतश्चिन्तयानस्य नित्यश:॥ ४॥
अनुवाद
एक ओर धर्म का पालन और दूसरी ओर राज्य का पालन-ये दोनों सदैव एक-दूसरे के विरोधी हैं। ऐसा सोचकर मैं निरन्तर चिन्तित रहता हूँ और मेरा मन मोह से भर जाता है।॥4॥
On the one hand, the practice of Dharma and on the other hand, the maintenance of the state-these two are always against each other. Thinking about this, I remain constantly worried and my mind is filled with delusion. ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥