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mahabharat 12.37.38: हे मनुष्यों के स्वामी! मन के समान वेगवान घोड़ों से जुते हुए श्वेत रथ पर सवार होकर ज्येष्ठ पाण्डव युयुत्सु युधिष्ठिर के पीछे चल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 12.37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.37.38 
आस्थाय तु रथं शुभ्रं युक्तमश्वैर्मनोजवै:।
अन्वयात् पृष्ठतो राजन् युयुत्सु: पाण्डवाग्रजम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! मन के समान वेगवान घोड़ों से जुते हुए श्वेत रथ पर सवार होकर ज्येष्ठ पाण्डव युयुत्सु युधिष्ठिर के पीछे चल रहे थे।
 
O lord of men! Riding on a white chariot drawn by horses as swift as the mind, the eldest Pandava Yuyutsu followed Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)