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mahabharat 12.37.36: उस समय माद्री के वीर पुत्र नकुल और सहदेव ने अपने हाथों में चन्द्रमा की किरणों के समान चमकने वाले रत्नजटित श्वेत पंखा और थाल लिए।   |   mahabharat अध्याय 12.37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.37.36 
चामरव्यजने त्वस्य वीरौ जगृहतुस्तदा।
चन्द्ररश्मिप्रभे शुभ्रे माद्रीपुत्रावलंकृते॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उस समय माद्री के वीर पुत्र नकुल और सहदेव ने अपने हाथों में चन्द्रमा की किरणों के समान चमकने वाले रत्नजटित श्वेत पंखा और थाल लिए।
 
At that time Madri's brave sons Nakula and Sahadeva took in their hands the white fan and dishes adorned with gems, shining like the rays of the moon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)