श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.37.35 
ध्रियमाणं च तच्छत्रं पाण्डुरं रथमूर्धनि।
शुशुभे तारकाकीर्णं सितमभ्रमिवाम्बरे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
रथ के ऊपर लगा सफेद छत्र आकाश में तारों से भरे सफेद बादल के समान सुन्दर लग रहा था।
 
The white umbrella erected over the chariot looked as beautiful as a white cloud filled with stars in the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)