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mahabharat 12.37.3: यह व्रतरूपी प्रायश्चित की चर्चा, बिना किसी भक्ष्य या अभक्ष्य वस्तु के, बड़ी रोचक है। यह मेरे हृदय में हर्ष उत्पन्न कर रही है। ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.37.3 
प्रायश्चित्तकथा ह्येषा भक्ष्याभक्ष्यविवर्जिता।
कौतूहलानुप्रवणा हर्षं जनयतीव मे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यह व्रतरूपी प्रायश्चित की चर्चा, बिना किसी भक्ष्य या अभक्ष्य वस्तु के, बड़ी रोचक है। यह मेरे हृदय में हर्ष उत्पन्न कर रही है। ॥3॥
 
This discussion of atonement in the form of fasting, without any edible or inedible thing, is very intriguing. It is creating joy in my heart. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)