श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  12.37.27-28 
सोऽनुनीतो नरव्याघ्र विष्टरश्रवसा स्वयम्।
द्वैपायनेन च तथा देवस्थानेन जिष्णुना॥ २७॥
एतैश्चान्यैश्च बहुभिरनुनीतो युधिष्ठिर:।
व्यजहान्मानसं दु:खं संतापं च महायशा:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! भगवान श्रीकृष्ण, द्वैपायन व्यास, देवस्थान, अर्जुन आदि अनेकों के अनुनय-विनय करने पर महाबली युधिष्ठिर ने अपना मानसिक शोक और संताप त्याग दिया। 27-28॥
 
Purusha Singh! On the persuasion and persuasion of Lord Krishna, Dwaipayana Vyas, Devasthan, Arjun and many others, the great Yudhishthira gave up his mental sorrow and anguish. 27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)