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वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त: स कृष्णेन राजा राजीवलोचन:।
हितार्थं सर्वलोकस्य समुत्तस्थौ महामना:॥ २६॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! श्रीकृष्ण के ऐसा कहने पर कमलनयन, महामनस्वी राजा युधिष्ठिर सम्पूर्ण जगत के कल्याण के लिए उठ खड़े हुए॥ 26॥
Vaishmpayana says: Janamejaya! Upon Shri Krishna saying this, the lotus-eyed, great-minded king Yudhishthira stood up for the welfare of the whole world.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥