श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.37.20 
वैशम्पायन उवाच
ततस्तं नृपतिश्रेष्ठं चातुर्वर्ण्यहितेप्सया।
पुनराह महाबाहुर्यदुश्रेष्ठो महामति:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तब परम बुद्धिमान एवं पराक्रमी यदुश्रेष्ठ श्रीकृष्ण ने चारों वर्णों के कल्याण की कामना करते हुए महारथी एवं जगत् के शिरोमणि युधिष्ठिर से यह बात कही॥20॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Then, the most intelligent and powerful Yadushrestha Shri Krishna, wishing for the welfare of all the four varnas, said this to Yudhishthir, the great warrior and head of the world. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)