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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश
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श्लोक 2
श्लोक
12.37.2
आपत्सु च यथा नीति: प्रणेतव्या द्विजोत्तम।
धर्म्यमालक्ष्य पन्थानं विजयेयं कथं महीम्॥ २॥
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! संकट के समय मुझे कौन सी नीति अपनानी चाहिए? धर्म के मार्ग पर दृष्टि रखते हुए मैं इस पृथ्वी पर कैसे विजय प्राप्त कर सकता हूँ?॥ 2॥
O best Brahmin! What policy should I follow in times of crisis? How can I conquer this earth while keeping my eyes on the path of Dharma?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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