श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.37.17 
एवमुक्तस्तु कौन्तेयो दीर्घप्रज्ञो महामति:।
उवाच वदतां श्रेष्ठं व्यासं सत्यवतीसुतम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर परम बुद्धिमान् और दूरदर्शी कुन्तीकुमार युधिष्ठिर ने वक्ताओं में श्रेष्ठ सत्यवतीनन्दन व्यासजी से कहा॥17॥
 
On his saying this, Kuntikumar Yudhishthir, the most intelligent and far-sighted person, said to Satyavatinandan Vyasji, the best among the speakers. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)