श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 37: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठिरका नगरमें प्रवेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.37.13 
मार्कण्डेयमुखात् कृत्स्नं यतिधर्ममवाप्तवान्।
रामादस्त्राणि शक्राच्च प्राप्तवान् पुरुषर्षभ:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
पुरुषार्थी भीष्म ने मार्कण्डेयजी के मुख से यतिधर्म का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया है और परशुराम तथा इन्द्र से अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की है ॥13॥
 
'The manly man Bhishma has received the complete knowledge of Yatidharma from the mouth of Markandeyaji and has received the teachings of weapons from Parashuram and Indra. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)