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mahabharat 12.365.9: सर्पराज द्वारा दी गई सलाह के अनुसार अपना कर्तव्य समझकर ब्राह्मण ने उसका पालन करने का संकल्प लिया और दूसरे वन में जाकर यम-नियम के नियमों का पालन करते हुए कुलीन लोगों से प्राप्त सीमित भोजन करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 12.365: नागराजसे विदा ले ब्राह्मणका च्यवनमुनिसे उञ्छवृत्तिकी दीक्षा लेकर साधनपरायण होना और इस कथाकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 365: नागराजसे विदा ले ब्राह्मणका च्यवनमुनिसे उञ्छवृत्तिकी दीक्षा लेकर साधनपरायण होना और इस कथाकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.365.9 
स च किल कृतनिश्चयो द्विजो
भुजगपतिप्रतिदेशितात्मकृत्य:।
यमनियमसहो वनान्तरं
परिगणितोञ्छशिलाशन: प्रविष्ट:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
सर्पराज द्वारा दी गई सलाह के अनुसार अपना कर्तव्य समझकर ब्राह्मण ने उसका पालन करने का संकल्प लिया और दूसरे वन में जाकर यम-नियम के नियमों का पालन करते हुए कुलीन लोगों से प्राप्त सीमित भोजन करने लगा।
 
Having understood his duty as per the advice given by the King of Snakes, the Brahmin resolved to follow it and went to another forest and started following the rules of Yama and Niyama, eating the limited food obtained from the noble people.
 
इति श्रीमहाभारते शतसाहस्रॺां संहितायां वैयासिक्यां शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि उञ्छवृत्त्युपाख्याने पञ्चषष्टॺधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें उञ्छवृत्तिका उपाख्यानविषयक तीन सौ पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६५॥

शान्तिपर्व सम्पूर्णम् अनुष्टुप्–(अन्य बड़े छन्द)–बड़े छन्दोंका ३२ अक्षरोंके अनुष्टुप् मानकर गिननेपर–गद्य–कुल योग उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये–१३२९६॥ – (६०९)–८३७।// –१३७॥ ।/ –१४२७१॥ /// दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये–४३०॥ –(१७)– २३।// –४५३॥ ।/ शान्तिपर्वकी कुल श्लोक-संख्या–१४७२५॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)