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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 365: नागराजसे विदा ले ब्राह्मणका च्यवनमुनिसे उञ्छवृत्तिकी दीक्षा लेकर साधनपरायण होना और इस कथाकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.365.7 
पृच्छमानाय तत्त्वेन मया चैवोत्तमा तव।
कथेयं कथिता पुण्या धर्म्या धर्मभृतां वर॥ ७॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर! इस समय जब तुमने मुझसे परम धर्म के विषय में प्रश्न किया है, तब उसके उत्तर में मैंने तुम्हें यह पुण्यमयी तथा धर्मयुक्त उत्तम कथा कही है। 7॥
 
Yudhishthir, the best among the religious souls! At this time, when you have asked me a question regarding the ultimate religion, then in response to that I have actually told you this virtuous and religiously excellent story. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)