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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 365: नागराजसे विदा ले ब्राह्मणका च्यवनमुनिसे उञ्छवृत्तिकी दीक्षा लेकर साधनपरायण होना और इस कथाकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.365.2 
स तेन कृतसंस्कारो धर्ममेवाधितस्थिवान्।
तथैव च कथामेतां राजन् कथितवांस्तदा॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपना दीक्षा-संस्कार किया और धर्म के मार्ग पर चलते हुए जीवनयापन करने लगे। हे राजन! उन्होंने धर्म की महिमा से संबंधित यह कथा च्यवन ऋषि को भी सुनाई।
 
He conducted his initiation ceremony and he started living by following the path of Dharma. O King! He also narrated this story related to the glory of uprightness to the sage Cyavana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)