Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.364.9: नागराज! मुझे पुण्य संचय के विषय में संदेह था। मैं निश्चय नहीं कर पा रहा था कि किस विधि को अपनाऊँ। किन्तु अब वह संदेह दूर हो गया है। साधु! अब मैं केवल अपने अभीष्ट की प्राप्ति के लिए उञ्चव्रत का व्रत करूँगा।॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.364: ब्राह्मणका नागराजसे बातचीत करके और उञ्छव्रतके पालनका निश्चय करके अपने घरको जानेके लिये नागराजसे विदा माँगना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आसीत् तु मे भोगपते संशय: पुण्यसंचये।
सोऽहमुञ्छव्रतं साधो चरिष्याम्यर्थसाधनम्॥ ९॥
अनुवाद
नागराज! मुझे पुण्य संचय के विषय में संदेह था। मैं निश्चय नहीं कर पा रहा था कि किस विधि को अपनाऊँ। किन्तु अब वह संदेह दूर हो गया है। साधु! अब मैं केवल अपने अभीष्ट की प्राप्ति के लिए उञ्चव्रत का व्रत करूँगा।॥9॥
Nagaraj! I had doubts about the accumulation of merits. I was unable to decide which method to adopt. But now that doubt has been dispelled. Sadhu! Now I will only perform the vow of Uñchhavrat for the attainment of my desired goal.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥