श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 364: ब्राह्मणका नागराजसे बातचीत करके और उञ्छव्रतके पालनका निश्चय करके अपने घरको जानेके लिये नागराजसे विदा माँगना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.364.7 
ब्राह्मण उवाच
एवमेतन्महाप्राज्ञ विदितात्मन् भुजङ्गम।
नातिक्रान्तास्त्वया देवा: सर्वथैव यथातथम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने कहा - हे महाज्ञानी एवं ज्ञानी नागराज! ऐसा ही है। देवता भी आपसे बड़े नहीं हैं। यह बात सर्वथा सत्य है।
 
The Brahmin said - O great wise and enlightened Nagaraj! It is like this. Even the gods are not greater than you. This is absolutely true. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)