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mahabharat 12.364.6: हे ब्राह्मण! मैं तुममें हूँ और तुम मुझमें हो, इसमें कोई संदेह नहीं है। हे पापरहित ब्राह्मण! यह सम्पूर्ण जगत् तुम्हारा है। मेरे रहते तुम्हें किस बात की चिंता है?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.364: ब्राह्मणका नागराजसे बातचीत करके और उञ्छव्रतके पालनका निश्चय करके अपने घरको जानेके लिये नागराजसे विदा माँगना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 364: ब्राह्मणका नागराजसे बातचीत करके और उञ्छव्रतके पालनका निश्चय करके अपने घरको जानेके लिये नागराजसे विदा माँगना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.364.6 
त्वयि चाहं द्विजश्रेष्ठ भवान् मयि न संशय:।
लोकोऽयं भवत: सर्व: का चिन्ता मयि तेऽनघ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! मैं तुममें हूँ और तुम मुझमें हो, इसमें कोई संदेह नहीं है। हे पापरहित ब्राह्मण! यह सम्पूर्ण जगत् तुम्हारा है। मेरे रहते तुम्हें किस बात की चिंता है?॥6॥
 
O Brahmin! I am in you and you are in me, there is no doubt about this. Sinless Brahmin! This entire world is yours. What are you worried about when I am here?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)