श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 364: ब्राह्मणका नागराजसे बातचीत करके और उञ्छव्रतके पालनका निश्चय करके अपने घरको जानेके लिये नागराजसे विदा माँगना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.364.2 
स्वस्ति तेऽस्तु गमिष्यामि साधो भुजगसत्तम।
स्मरणीयोऽस्मि भवता सम्प्रेषणनियोजनै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे भुजंग शिरोमणे! आपका कल्याण हो। अब मैं यहाँ से चला जाऊँगा, किन्तु यदि आपको मुझे कहीं भेजना हो या किसी कार्य हेतु नियुक्त करना हो, तो ऐसे अवसरों पर अवश्य मेरा स्मरण कीजिएगा॥ 2॥
 
O Bhujang Shiromane! May you be blessed. Now I will leave from here, but if you have to send me somewhere or appoint me for some work, then you must remember me on such occasions.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)