एष मे निश्चय: साधो कृतं कारणमुत्तमम्।
आमन्त्रयामि भद्रं ते कृतार्थोऽस्मि भुजङ्गम॥ १०॥
अनुवाद
महात्मन! यह मेरा निश्चय है। आपके द्वारा मेरा कार्य बहुत अच्छे ढंग से संपन्न हुआ है। भुजंगम! मैं पूर्ण हो गया हूँ। आपका कल्याण हो। अब मैं जाने की अनुमति चाहता हूँ॥10॥
Mahatman! This is my determination. My work has been accomplished in a very good manner by you. Bhujangam! I am fulfilled. May you be blessed. Now I seek permission to leave.॥10॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि उञ्छवृत्त्युपाख्याने चतु:षष्टॺधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३६४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें उञ्छवृत्तिका उपाख्यानविषयक तीन सौ चौसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥