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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 363: उञ्छ एवं शिलवृत्तिसे सिद्ध हुए पुरुषकी दिव्य गति
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श्लोक 5
श्लोक
12.363.5
न हि देवा न गन्धर्वा नासुरा न च पन्नगा:।
प्रभवन्तीह भूतानां प्राप्तानामुत्तमां गतिम्॥ ५॥
अनुवाद
ऐसे लोग जिस परम गति को प्राप्त करते हैं, उसे न तो देवता, न गंधर्व, न राक्षस, न सर्प ही प्राप्त कर सकते हैं।
The supreme state which such people attain, can neither be attained by gods, nor Gandharvas, nor demons, nor serpents.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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