Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.363.1: सूर्यदेव बोले- वह न तो वायु का मित्र अग्निदेव था, न राक्षस या सर्प था। वह तो एक ऋषि था, जो धर्मपूर्वक जीवन-यापन करने के व्रत का पालन करके सिद्धि प्राप्त कर दिव्य धाम को प्राप्त हुआ था॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.363: उञ्छ एवं शिलवृत्तिसे सिद्ध हुए पुरुषकी दिव्य गति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूर्य उवाच
नैष देवोऽनिलसखो नासुरो न च पन्नग:।
उञ्छवृत्तिव्रते सिद्धो मुनिरेष दिवं गत:॥ १॥
अनुवाद
सूर्यदेव बोले- वह न तो वायु का मित्र अग्निदेव था, न राक्षस या सर्प था। वह तो एक ऋषि था, जो धर्मपूर्वक जीवन-यापन करने के व्रत का पालन करके सिद्धि प्राप्त कर दिव्य धाम को प्राप्त हुआ था॥1॥
The Sun God said- He was neither Agnidev, the friend of Vayu, nor was he a demon or a snake. He was a sage who had attained perfection by following the vow of living a life of righteousness and had reached the divine abode.॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥