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mahabharat 12.362.4: महान वायुदेव सूर्यमण्डल से निकलकर सूर्य की किरणों का आश्रय लेते हैं और सम्पूर्ण आकाश में फैल जाते हैं। इससे बढ़कर आश्चर्य की बात और क्या हो सकती है?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.362: नागराजका ब्राह्मणके पूछनेपर सूर्यमण्डलकी आश्चर्यजनक घटनाओंको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.362.4 
यतो वायुर्विनि:सृत्य सूर्यरश्म्याश्रितो महान्।
विजृम्भत्यम्बरे तत्र किमाश्चर्यमत: परम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महान वायुदेव सूर्यमण्डल से निकलकर सूर्य की किरणों का आश्रय लेते हैं और सम्पूर्ण आकाश में फैल जाते हैं। इससे बढ़कर आश्चर्य की बात और क्या हो सकती है?॥4॥
 
The great Vayu Deva emerges from the solar system, takes shelter of the sun's rays and spreads across the entire sky. What can be more surprising than this?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)