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mahabharat 12.362.3: जैसे वृक्ष की शाखाओं पर अनेक पक्षी घोंसला बनाते हैं, उसी प्रकार सूर्यदेव की सहस्रों किरणों की शरण में देवताओं सहित सिद्ध और ऋषिगण निवास करते हैं।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.362: नागराजका ब्राह्मणके पूछनेपर सूर्यमण्डलकी आश्चर्यजनक घटनाओंको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 362: नागराजका ब्राह्मणके पूछनेपर सूर्यमण्डलकी आश्चर्यजनक घटनाओंको सुनाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.362.3 
यस्य रश्मिसहस्रेषु शाखास्विव विहंगमा:।
वसन्त्याश्रित्य मुनय: संसिद्धा दैवतै: सह॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जैसे वृक्ष की शाखाओं पर अनेक पक्षी घोंसला बनाते हैं, उसी प्रकार सूर्यदेव की सहस्रों किरणों की शरण में देवताओं सहित सिद्ध और ऋषिगण निवास करते हैं।॥3॥
 
Just as many birds nest on the branches of a tree, similarly the Siddhas and sages along with the Gods reside under the shelter of thousands of rays of the Sun God. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)