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mahabharat 12.362.16: तत्पश्चात् वह आकाश को भेदकर सूर्य किरणों के समूह में लीन हो गया और क्षण भर में ही वह चमकते हुए तारे के साथ एकाकार होकर सूर्य हो गया ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.362: नागराजका ब्राह्मणके पूछनेपर सूर्यमण्डलकी आश्चर्यजनक घटनाओंको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 362: नागराजका ब्राह्मणके पूछनेपर सूर्यमण्डलकी आश्चर्यजनक घटनाओंको सुनाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.362.16 
ततो भित्त्वैव गगनं प्रविष्टो रश्मिमण्डलम्।
एकीभूतं च तत् तेज: क्षणेनादित्यतां गतम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह आकाश को भेदकर सूर्य किरणों के समूह में लीन हो गया और क्षण भर में ही वह चमकते हुए तारे के साथ एकाकार होकर सूर्य हो गया ॥16॥
 
After that, after piercing the sky, he got absorbed in the group of sun rays and in a moment he became one with the bright star and became the sun. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)