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हुताहुतिरिव ज्योतिर्व्याप्य तेजोमरीचिभि:।
अनिर्देश्येन रूपेण द्वितीय इव भास्कर:॥ १४॥
अनुवाद
घी की आहुति से प्रज्वलित अग्नि के समान वे अपनी तेजस्वी किरणों से सम्पूर्ण आकाशमण्डल को व्याप्त करते हुए दूसरे सूर्य के समान अवर्णनीय रूप से प्रकाशित हो रहे थे।
Like the fire ignited by the offering of ghee, he, permeating the entire galaxy with his radiant rays, shone indescribably like a second Sun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥