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mahabharat 12.362.13: वे अपने तेज से सम्पूर्ण लोकों को प्रकाशित करते हुए मानो आकाश को चीरते हुए सूर्य की ओर बढ़ रहे थे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.362: नागराजका ब्राह्मणके पूछनेपर सूर्यमण्डलकी आश्चर्यजनक घटनाओंको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 362: नागराजका ब्राह्मणके पूछनेपर सूर्यमण्डलकी आश्चर्यजनक घटनाओंको सुनाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.362.13 
स लोकांस्तेजसा सर्वान् स्वभासा निर्विभासयन्।
आदित्याभिमुखोऽभ्येति गगनं पाटयन्निव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वे अपने तेज से सम्पूर्ण लोकों को प्रकाशित करते हुए मानो आकाश को चीरते हुए सूर्य की ओर बढ़ रहे थे॥13॥
 
Illuminating all the worlds with his brilliance, it seemed as if he was tearing through the sky and moving towards the Sun.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)