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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.361.6 
तस्य चाहमसांनिध्ये श्रुतवानस्मि तं गतम्।
स्वजनात् तं प्रतीक्षामि पर्जन्यमिव कर्षक:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैंने उनके सम्बन्धियों से सुना है कि वे यहाँ से बहुत दूर चले गए हैं, अतः जैसे किसान वर्षा की प्रतीक्षा करता है, वैसे ही मैं भी उनकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ ॥6॥
 
I have heard from their relatives that they have gone far away from here, so just like a farmer waits for the rains, I too am waiting for them. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)