vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत
»
श्लोक 4
श्लोक
12.361.4
आभिमुख्यादभिक्रम्य स्नेहात् पृच्छामि ते द्विज।
विविक्ते गोमतीतीरे कं वा त्वं पर्युपाससे॥ ४॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! मैं आपके समक्ष आकर आपसे प्रेमपूर्वक पूछता हूँ कि आप गोमती नदी के इस निर्जन तट पर किसकी पूजा करते हैं?॥4॥
Brahman! I come before you and lovingly ask you whom do you worship on this lonely bank of the Gomati river?'॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×