श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.361.3 
भो भो: क्षाम्याभिभाषे त्वां न रोषं कर्तुमर्हसि।
इह त्वमभिसम्प्राप्त: कस्यार्थे किं प्रयोजनम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणदेव! मेरे पापों को क्षमा करें। मुझ पर क्रोध न करें। मैं आपसे पूछता हूँ कि आप यहाँ क्यों आए हैं? आपका उद्देश्य क्या है?॥3॥
 
O Brahmindev! Please forgive my sins. Do not be angry with me. I ask you why have you come here? What is your purpose?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)