श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.361.15 
प्रकाशितस्त्वं स्वगुणैर्यशोगर्भगभस्तिभि:।
शशाङ्ककरसंस्पर्शैर्हृद्यैरात्मप्रकाशितै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
आप चन्द्रमा की किरणों के समान स्पर्श करने में सुखदायक हैं, तथा उत्तम यश की किरणों से स्वयं प्रकाशित हैं, जो आपके ही सुन्दर गुणों से प्रकाशित हैं ॥15॥
 
You are like the rays of the moon, pleasant to touch, and self-illuminating with the rays of good fame, which are radiant with your own beautiful qualities. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)