श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.361.13 
ब्राह्मण उवाच
आगतोऽहं महाभाग तव दर्शनलालस:।
कंचिदर्थमनर्थज्ञ: प्रष्टुकामो भुजङ्गम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने कहा - हे श्रेष्ठ नागराज! मैं आपके दर्शन की इच्छा से यहाँ आया हूँ। मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ, जो मैं स्वयं नहीं जानता॥13॥
 
The Brahmin said - O great Nagaraj! I have come here with the desire to see you. I want to ask you one thing which I myself do not know.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)