श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 361: नागराज और ब्राह्मणका परस्पर मिलन तथा बातचीत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.361.10 
भवन्तं स्वजनादस्मि सम्प्राप्तं श्रुतवानहम्।
अतस्त्वां स्वयमेवाहं द्रष्टुमभ्यागतो द्विज॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! मैंने अपनी सम्बन्धी (पत्नी) से आपके आगमन का समाचार सुना है, अतः मैं स्वयं आपके दर्शन करने आया हूँ॥ 10॥
 
O Brahman! I have heard from my relative (wife) about your arrival; therefore I have come myself to see you.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)