श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 360: पत्नीके धर्मयुक्त वचनोंसे नागराजके अभिमान एवं रोषका नाश और उनका ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.360.9 
आशया ह्यभिपन्नानामकृत्वाश्रुप्रमार्जनम्।
राजा वा राजपुत्रो वा भ्रूणहत्यैव युज्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपने पास आशा लेकर आए हुए लोगों के आँसू नहीं पोंछता, चाहे वह राजा हो या राजकुमार, वह भ्रूण हत्या का पाप करता है ॥9॥
 
He who does not wipe away the tears of those who have come to him with hope, be it a king or a prince, commits the sin of killing an embryo. ॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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