श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 360: पत्नीके धर्मयुक्त वचनोंसे नागराजके अभिमान एवं रोषका नाश और उनका ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.360.8 
तद्रोषं सहजं त्यक्त्वा त्वमेनं द्रष्टुमर्हसि।
आशाच्छेदेन तस्याद्य नात्मानं दग्धुमर्हसि॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम अपना क्रोध त्यागकर इस ब्राह्मण देवता का दर्शन करो। उसकी आशाओं को नष्ट करके स्वयं आज ही भस्म मत हो जाना। ॥8॥
 
Therefore, give up your usual anger and have a darshan of this Brahmin deity. Do not destroy his hopes and burn yourself to ashes today. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)