श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 360: पत्नीके धर्मयुक्त वचनोंसे नागराजके अभिमान एवं रोषका नाश और उनका ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.360.6 
स हि कार्यान्तराकाङ्क्षी जलेप्सु: स्तोकको यथा।
वर्षं वर्षप्रिय: पक्षी दर्शनं तव काङ्क्षति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जैसे प्यासी पक्षी कोयल वर्षा के जल की प्रतीक्षा करती है, वैसे ही वे ब्राह्मण किसी अन्य कार्य की इच्छा से आपके दर्शन की इच्छा रखते हैं ॥6॥
 
Just as the thirsty bird Cuckoo, a lover of rain water, waits for the rain to come, similarly those Brahmins seek Your darshan with the desire to accomplish some other task. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)