vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 360: पत्नीके धर्मयुक्त वचनोंसे नागराजके अभिमान एवं रोषका नाश और उनका ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये उद्यत होना
»
श्लोक 2
श्लोक
12.360.2
को हि मां मानुष: शक्तो द्रष्टुकामो यशस्विनि।
संदर्शनरुचिर्वाक्यमाज्ञापूर्वं वदिष्यति॥ २॥
अनुवाद
यशस्विनी! कौन मुझे देखने की इच्छा कर सकता है और यदि देखना भी चाहे तो इस प्रकार आज्ञा देकर कौन मुझे बुला सकता है?॥2॥
Yashaswini! Who can wish to see me and even if he wishes to see me, who can call me by giving orders like this?॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×