श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 360: पत्नीके धर्मयुक्त वचनोंसे नागराजके अभिमान एवं रोषका नाश और उनका ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.360.2 
को हि मां मानुष: शक्तो द्रष्टुकामो यशस्विनि।
संदर्शनरुचिर्वाक्यमाज्ञापूर्वं वदिष्यति॥ २॥
 
 
अनुवाद
यशस्विनी! कौन मुझे देखने की इच्छा कर सकता है और यदि देखना भी चाहे तो इस प्रकार आज्ञा देकर कौन मुझे बुला सकता है?॥2॥
 
Yashaswini! Who can wish to see me and even if he wishes to see me, who can call me by giving orders like this?॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)