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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 360: पत्नीके धर्मयुक्त वचनोंसे नागराजके अभिमान एवं रोषका नाश और उनका ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये उद्यत होना
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श्लोक 19
श्लोक
12.360.19
आत्मानं च विशेषेण प्रशंसाम्यनपायिनी।
यस्य मे त्वं विशालाक्षि भार्या गुणसमन्विता॥ १९॥
अनुवाद
विशाललोचने! मैं विशेष रूप से अपनी और अपने सौभाग्य की प्रशंसा करता हूँ कि मुझे तुम्हारे समान पतिव्रता स्त्री मिली है, जो तुम्हें कभी नहीं छोड़ेगी॥19॥
Vishallochane! I especially praise myself and my good fortune that I have got a wife like you who is virtuous and who will never leave you.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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