सर्प ने कहा- साध्वी! मुझे अहंकार के कारण अभिमान नहीं है; अपितु जाति-दोष के कारण महान क्रोध है। अब आपने अपने वचनरूपी अग्नि से मेरे उस क्रोध को जलाकर भस्म कर दिया है॥13॥
The snake said – Sadhvi! I am not proud because of ego; But there is great anger due to caste-fault. Now you have burnt that anger of mine to ashes with the fire of your words. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥