श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 360: पत्नीके धर्मयुक्त वचनोंसे नागराजके अभिमान एवं रोषका नाश और उनका ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.360.11 
भूप्रदानेन च गतिं लभत्याश्रमसम्मिताम्।
न्याय्यस्यार्थस्य सम्प्राप्तिं कृत्वा फलमुपाश्नुते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भूमिदान करने से मनुष्य आश्रमधर्म का पालन करने वाले के समान उत्तम गति को प्राप्त होता है। न्यायपूर्वक धन कमाने से मनुष्य उत्तम फल प्राप्त करता है ॥11॥
 
By donating land, a man attains a good state similar to that of a person who follows the religion of the ashram. By earning money justly, a man gets the best reward. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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