Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.36.46: जैसे हाथी काठ का और मृग चमड़े का बना होता है, वैसे ही ब्राह्मण भी वेदों के अध्ययन से रहित है। ये तीनों नाम मात्र के लिए ही धारण किए जाते हैं (परन्तु अपने नाम के अनुसार कार्य नहीं करते)।॥ 46॥ | mahabharat अध्याय 12.36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा दारुमयो हस्ती यथा चर्ममयो मृग:।
ब्राह्मणश्चानधीयानस्त्रयस्ते नाम बिभ्रति॥ ४६॥
अनुवाद
जैसे हाथी काठ का और मृग चमड़े का बना होता है, वैसे ही ब्राह्मण भी वेदों के अध्ययन से रहित है। ये तीनों नाम मात्र के लिए ही धारण किए जाते हैं (परन्तु अपने नाम के अनुसार कार्य नहीं करते)।॥ 46॥
‘Just like an elephant made of wood and a deer made of leather, similarly a Brahmin is devoid of the study of the Vedas. These three are worn only in name (but do not work as per their name).॥ 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥