Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.36.4: ‘प्रजापति! भोजन क्या है? पात्र कैसा होना चाहिए? दान, अध्ययन और तप का स्वरूप क्या है? कर्तव्य क्या है और अकर्तव्य क्या है? यह सब हमें बताइए।’॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथमन्नं कथं पात्रं दानमध्ययनं तप:।
कार्याकार्यं च यत् सर्वं शंस वै त्वं प्रजापते॥ ४॥
अनुवाद
‘प्रजापति! भोजन क्या है? पात्र कैसा होना चाहिए? दान, अध्ययन और तप का स्वरूप क्या है? कर्तव्य क्या है और अकर्तव्य क्या है? यह सब हमें बताइए।’॥4॥
‘Prajapati! What is food? What should the vessel be like? What is the nature of charity, study and austerity? What is duty and what is non-duty? Tell us all this.’॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥