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mahabharat 12.36.36-38: सत्पुरुष को चाहिए कि वह यश के लोभ से, भय से अथवा किसी ऐसे व्यक्ति को दान न दे जिसने उसकी सहायता की हो। अर्थात् जो कुछ उसे दिया जाए, उसे दान न समझे। नाचने, गाने, ठट्ठा करनेवाले, मद्यपान करनेवाले, पागल, चोर, निंदक, गूंगे, जड़, अंगहीन, बौने, दुष्ट, भ्रष्ट कुल में उत्पन्न तथा व्रत और अनुष्ठान से रहित को दान न दे। श्रोत्रिय के अतिरिक्त वेदों के ज्ञान से रहित ब्राह्मण को भी दान न दे।॥ 36-38॥   |   mahabharat अध्याय 12.36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 36-38
 
 
श्लोक  12.36.36-38 
न दद्याद् यशसे दानं न भयान्नोपकारिणे॥ ३६॥
न नृत्यगीतशीलेषु हासकेषु च धार्मिक:।
न मत्ते चैव नोन्मत्ते न स्तेने न च कुत्सके॥ ३७॥
न वाग्घीने विवर्णे वा नाङ्गहीने न वामने।
न दुर्जने दौष्कुले वा व्रतैर्यो वा न संस्कृत:।
न श्रोत्रियमृते दानं ब्राह्मणे ब्रह्मवर्जिते॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
सत्पुरुष को चाहिए कि वह यश के लोभ से, भय से अथवा किसी ऐसे व्यक्ति को दान न दे जिसने उसकी सहायता की हो। अर्थात् जो कुछ उसे दिया जाए, उसे दान न समझे। नाचने, गाने, ठट्ठा करनेवाले, मद्यपान करनेवाले, पागल, चोर, निंदक, गूंगे, जड़, अंगहीन, बौने, दुष्ट, भ्रष्ट कुल में उत्पन्न तथा व्रत और अनुष्ठान से रहित को दान न दे। श्रोत्रिय के अतिरिक्त वेदों के ज्ञान से रहित ब्राह्मण को भी दान न दे।॥ 36-38॥
 
‘A virtuous man should not give charity out of greed for fame, out of fear or to someone who has helped him. That is, whatever is given to him should not be considered as charity. He should not give charity to those who dance, sing, joke, are intoxicated, insane, thieves, slanderers, dumb, dull, limbless, dwarf, wicked, born in a corrupt family and devoid of vows and rituals. Apart from a Shrotri, one should not give charity to a Brahmin who has no knowledge of Vedas.॥ 36-38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)